UP Court Summons India: अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार चरम पर है. इस बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया की नजर टिकी है. इसकी वजह सिर्फ अमेरिका में हो रहे चुनाव ही नहीं बल्कि और भी कई कारण हैं जो प्रधानमंत्री मोदी के इस अमेरिकी दौरे को पहले से खास और चर्चित बना दिया है.
प्रधानमंत्री मोदी ऐसे समय अमेरिकी दौरे पर हैं, जहां राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए एक तरफ उनके खास मित्र और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रिपबल्किन उम्मीवार हैं. वहीं दूसरी तरफ मौजूदा उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस हैं जो भारतवंशी भी हैं. चुनाव प्रचार में लगातार डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़त बनाए हुए हैं और जैसा कि सभी जानते हैं कि इस समय अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन भी डेमोक्रेट लीडर ही हैं.
सामंजस्य बनाना चुनौती
यानी प्रधानमंत्री मोदी को इस बार के अमेरिकी दौरे पर सामंजस्य बनाए रखना होगा क्योंकि आपको याद होगा कि जब पिछली बार डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे उस समय जैसे भारत में अबकी बार मोदी सरकार का नारा लगा था. उसी तर्ज पर तब अमेरिका में अबकी ट्रंप सरकार का नारा काफी सुर्खियों में रहा था.
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव हार गए थे और जो बाइडन चुनाव जीतकर अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के इस बार के अमेरिकी दौरे पर सबकी नजर टिकी होगी कि वो इस चुनाव को लेकर कुछ बोलते हैं या फिर नो-कमेंटस की मुद्रा में रहते हैं.
यहीं नहीं अमेरिकी चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर जिस तरह दो बार हमले हुए, जिसमें एक बार तो गोली उनकी काम को घायल करती हुई निकल गई. जबकि दूसरी बार उनपर जानलेवा हमले की कोशिश की गई. लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस के एजेंट ने उसे नाकाम कर दिया.
खास सतर्कता बरतने की जरूरत
ऐसे में जब भारतीय प्रधानमंत्री मोदी इस बार अमेरिकी दौरे पर हैं तो उनकी सुरक्षा को लेकर एसपीजी और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की ओर से खास सतर्कता बरती जा रही है. दरअसल, इस समय कनाडा की तरह अमेरिका में भी खालिस्तानी समर्थक भारत विरोधी साजिश में लिप्त हैं.
यहीं प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा ऐसे समय हो रहा है जब न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला कोर्ट ने भारत सरकार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पूर्व रॉ प्रमुख सामंत गोयल को समन भेजा है. ये समन खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश के संबंध में जारी किया गया है.
हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कोर्ट के इस पर दो टूक अंदाज में कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए साफ कर दिया है कि ये पूरी तरह से अनुचित और निराधार आरोप हैं, क्योंकि गुरपतवंत सिंह पन्नू एक गैरकानूनी संगठन का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे प्रतिबंधित किया हुआ है.
जंग खत्म करने का मिशन
यानी कहा जा सकता है 9/11 जैसे भयावह आतंकी हमले का सामना करने के बाद भी अमेरिका की आंख नहीं खुल रही है. वो अब एक खलिस्तानी आतंकी जो भारत को दुश्मन हैं उसका संरक्षक बना हुआ है. यहीं नहीं प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पीएम मोदी रुस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को खत्म कराने के मिशन पर लगे हैं. हाल ही में युद्ध के बीच युक्रेन जाकर जेलेस्की से मिले और फिर एनएसए अजित डोभाल को अपने दूत की रह रुस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भेजकर अपना संदेश दिया.
जेलेंस्की भी इसी महीने के आखिरी हफ्ते में अमेरिका का दौरा करेंगे और जो बाइडन से मुलाकात करेंगे. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे पर रुस-युक्रेन जंग को लेकर अमेरिका के साथ अनौपचारिक तौर पर बातचीत हो सकती है. वैसे भी दुनिया जान रही है कि अमेरिका खुलकर युक्रेन का साथ दे रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का कुटनीतिक कौशल हैरान करता है.
कार्यक्रमों की लिस्ट लंबी
यहीं नहीं प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिकी दौरा ऐसे समय हो रहा है. जब हाल ही में कुछ ही दिन पहले कांग्रेस सांसद और अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका का दौरा किया और इस दौरे पर उनके बयानों और मुलाकातों को लेकर इतने विवाद और बवाल सामवे आए की पूछिए ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर कांग्रेस की क्या प्रतिक्रिया होगी उस पर भी सबकी नजर होगी
और जहां तक बात प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे पर कार्यक्रमों की तो उसकी लिस्ट भी काफी लंबी है. तीन दिवसीय यात्रा पर पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानंत्री एंथनी अल्बनीस और जापानी प्रधानमंत्री एम फुमियो किशिदा से मिलकर हिंद-प्रशांत में क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा करेंगे. इस दौरान द्विपक्षीय चर्चा भी होगी
क्वाड लीडर्स के साथ पीएम मोदी
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के गृहनगर विलमिंगटन, डेलावेयर में छठे क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. दरअसल, क्वाड का पूरा नाम… द क्वाड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग है और ये चार देशों अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का एक समूह है और अमेरिका क्वाड के अंदर भारत को अगुआ के रूप में देखता है.
इस बार क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की बारी भारत की थी. लेकिन वाशिंगटन के आग्रह पर भारत अगले वर्ष सम्मेलन की मेजबानी करेगा. प्रधानमंत्री 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे और 23 सितंबर को वो न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘समिट ऑफ द फ्यूचर’ को संबोधित करेंगे.
नए रास्तों की समीक्षा
वहीं अमेरिका दौरे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए अपने सहयोगियों राष्ट्रपति जो बाइडन, प्रधानमंत्री अल्बनीज और प्रधानमंत्री किशिदा के साथ शामिल होने के लिए उत्सुक हूं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बाइडन के साथ बैठक हमें भारत-अमेरिका के बीच वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए नए रास्तों की समीक्षा और पहचान करने की अनुमति देगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे ये भी कहा कि वो भारतीय प्रवासियों और महत्वपूर्ण अमेरिकी व्यापारिक नेताओं के साथ जुड़ने का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य का शिखर सम्मेलन वैश्विक समुदाय के लिए मानवता की बेहतरी के लिए आगे की राह तैयार करने का एक अवसर है और वो मानवता के छठे हिस्से के विचारों को साझा करेंगे, क्योंकि शांतिपूर्ण और सुरक्षित भविष्य में उनकी हिस्सेदारी दुनिया में सबसे अधिक है. यानी कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का इस बार का अमेरिका दौरा कई मायनों में खास है.


