Haryana Election Result 2024: देश की सियासत में अगर कोई सबसे सफल और मशहूर मौसम विज्ञानी हुआ तो वो बेशक दिवंगत राम विलास पासवान थे और फिलहाल उनके आसपास भी कोई नहीं टिकता. क्या टाइमिंग होती थी उनकी. चुनाव से पहले किसके साथ जाना है और चुनाव के बाद किसके साथ कब तक रहना है. ये सब भांपने में उनका कोई सानी अब तक पैदा नहीं हुआ.
वैसे तो किसी भी कामयाबी के पीछे टाइमिंग का बड़ा हाथ होता है. लेकिन सियासत में तो समझ लीजिए की टाइमिंग ही सबकुछ. शायद इसी को देखते हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ नेताओं ने खुद को मौसम विज्ञानी मानने की भूल कर दी और उसका नतीजा क्या हुआ अब दुनिया जानती है.
अचानक पुराने घर में लौटे
हरियाणा चुनाव के नतीजे आने के बाद एन वक्त पर बीजेपी का साथ छोड़ने वाले तीन बड़े नेताओं के लिए अब हाथ मलाने के सिवाय कोई काम नहीं बचा है, जिन्होंने मतदान से ठीक पहले हाथ यानी कांग्रेस का दामन थामा उनका हश्र तो पूछिए मत. इन्हीं में से एक हैं अशोक तंवर. जनाब पुराने दलबदलु हैं. लेकिन इनका दल बदलने का इस बार का अंदाज गजब था. अशोक तंवर मतदान से दो-तीन दिन पहले बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनाने का दावा करते-करते अचानक राहुल गांधी के मंच पर आकर अपने पुराने घर कांग्रेस में वापसी का एलान कर दिया.
वैसे अशोक तंवर एक समय पर कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक थे. एक समय तो वह हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे. माना जाता है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा से टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद ही अशोक तंवर ने कांग्रेस का साथ छोड़ा था. वो जानते थे कि फिलहाल हुड्डा की ही चल रही है लेकिन शैलजा के साथ हुड्डा की लड़ाई में अशोक तंवर ने खुद का अपना मौका देखा क्योंकि हरियाणा में कांग्रेस की हवा के बीच हुड्डा बनाम शैलजा की लड़ाई का भी हल्ला था. चुनाव प्रचार के आखिर में हर तरफ कांग्रेस के जीतने का भी शोर मच रहा था और इसी शोर को अशोक तंवर श्योर यानी निश्चित जीत मानने की गलती कर बैठे.
अब केवल पछतावा
वैसे अशोक तंवर के बारे में कहा जाता है कि वो जिसके साथ भी जुड़ते हैं उनका बंटाधार कर देते हैं. वो कुछ समय के लिए ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से भी जुड़े थे. उसके बाद आम आदमी पार्टी में भी गए थे और फिर बीजेपी में वापस आए थे. बीजेपी ने उन्हें मौजूदा सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटकर सिरसा से चुनाव भी लड़वाया था लेकिन वो कुमारी शैलजा से हार गए थे. इस बार कांग्रेस की हवा चली तो उस ओर चल दिए. तब उन्हें लगा कि कांग्रेस में दलित शैलजा को लेकर जो मारा-मारा चल रही है उसमें उनकी भी लॉटरी लग सकती है. इसी अधीरता के कारण वो चूक कर बैठे और आज उन्हें पछताने के सिवा और कुछ हाथ नहीं लगा है.
इन दोनों ने भी की बगावत
इसी तरह एक और कांग्रेसी नेता हैं पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह. तब बृजेंद्र सिंह ने हिसार से टिकट कटने की आशंकाओं के बीच बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. लेकिन कांग्रेस ने उन्हें ना तो हिसार से और ना ही सोनीपत से ही टिकट दिया. हालांकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें सीट तो दी लेकिन वो उचाना कलां जैसी इतनी टफ सीट दी जहां जीतने की संभावना कम और हार की आशंका ज्यादा थी क्योंकि ये सीट चौटाला परिवार की परपंरगात सीट थी. यहां से दुष्यंत चौटाला विधायक रहे थे तो इस बार वो हार कर इतने पायदान नीचे आ गए कि उसकी गिनती भी मुश्किल है.
बिजेद्र के टपकता वीरेंद्र सिंह बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं. वो भी कांग्रेस से ही बीजेपी में आए थे. इसी तरह चौटाला परिवार से आन वाले रणजीत सिंह चौटाला हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से बगावत करने वाले नेताओं में शामिल हैं. वो तो सैनी सरकार में बिजली मंत्री भी रहे. लेकिन जब चुनाव नजदीक आया और बीजेपी ने उन्हें रानियां से टिकट देने से इनकार कर दिया तो वह नाराज होकर पार्टी से ही बगावत कर बैठे.


