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Election 2024: महाराष्ट्र और झारखंड में अलग-अलग गुल खिला रही सियासत, BJP के लिए हर राज्य में चुनौती

Election 2024: महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी सरगर्मी चरम पर है और यहां जिस तरह की राजनीति देखने को मिल रही है वो बहुत ही दिलचस्प है. इस बीच दोनों ही राज्यों की एक एक तस्वीरें कापी चर्चा में है. महाराष्ट्र में एक पोस्टर जिसमें मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो के साथ उनका टैग लाइन ‘बंटेंगे तो कटेंगे’, हर जगह टंगा या कहे तो टांग दिया गया है.

इसी तरह झारंखड में चुनाव से ठीक पहले जेएमएम नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपरेशन हेमंत चलाकर बीजेपी के ऑपरेशन कमल को बड़ा झटका दिया. बीजेपी की उस नेता को अपने पाले में ला खड़ा किया है जिसने बीजेपी में रहते कभी हेमंत सोरेन को हराया था. जी हां. ये लुईस मरांडी हैं, जिन्होंने 2014 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन के खिलाफ जीत दर्ज कर दुमका में पहली बार कमल खिलाया था. अब वो और कई और नेता जेएमएम में शामिल हो गए हैं और इन दोनों ही तस्वीरों के कई मायने हैं.

चुनावों के बीच गठबंधन का पेंच

दोनों ही राज्यों यानी महाराष्ट्र और झारखंड में गठबंधन की राजनीति का ही जोर है. महाराष्ट्र में तो गठबंधनों की ऐसी बहार कि लोगों से लेकर विश्लेषकों तक उस कहावत को दोहरा रहे हैं कि ज्यादा जोगी मठ उजाड़ और ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है कि क्योंकि यहां कांग्रेस की अगुवाई वाला महाविकास अघाड़ी हो या भाजपा की अगुवाई वाला महायुति गठबंधन यहां सभी सहयोगी खुद के मोहरे से अपने ही सहयोगियों को मात देने में मशगूल हैं.

मामला चाहे शीट शेयरिंग का हो या फिर सीएम पद की रेस का सभी अपने लिए रेस जीतने में लगे हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना उद्धव गुट के बीच शीट शेयरिंग से लेकर सीएम पद की दावेदारी को लेकर तू डाल-डाल मैं पात-पात का खेल चल रहा है. बातचीत का कोई फाइनल निष्कर्ष निकलता न देखकर अब इस मामले में अंतिम ब्रह्मास्त्र के तौर पर घाघ नेता शरद पवार को अपने पावर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.

वैसे भी शरद पवार की ही कृपा से उद्धव ठाकरे को सीएम की कुर्सी नसीब हो पाई थी और लगता है कि तब से उनके दिलों दिमाग में ये कुर्सी इस कदर बैठ गई है कि वो इसे निकलने ही नहीं देना चाहते हैं. लगता है कि गठबंधन में गांठ की असल वजह भी ये ही है. वहीं बीजेपी की अगवाई वाले गठबंधन में बीजपी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दिए है.

राजनीति में भूचाल

इसी बीच महाराष्ट्र में एक पोस्टर ने वहां कि राजनीति में जैसे भूचाल ला दिया है और ये पोस्टर है बीजेपी के पोस्टर बाय योगी का जिसमें उनका मशहूर टैग लाइन ‘बटेंगे तो कटेंगे’ मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है. अब इस पोस्ट को किस संगठन की ओर से या किसके कहने पर लगाया गया इसपर चर्चा का कोई मतलब नहीं है क्योंकि सबको पता है कि इस पीछे कौन हो सकता है.

मुंबई के अंधेरी ईस्ट, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे और बांद्रा इलाके में उनकी होर्डिंग्स लगी हैं और इस योगी की तस्वीर के साथ “बंटेंगे तो कटेंगे” का नारा लिखा है. हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद अब महाराष्ट्र चुनाव में योगी के इस नारे की एंट्री हुई है. लेकिन यहां सबसे अहम बात ये है कि महाराष्ट्र में जिस तरह महा विकास अगाड़ी जाति का कार्ड खेला और बीजेपी अपनी पसंदीदा हिंदू और हिंदूत्व कार्ड पर लौट आई है. कहा जा सकता है लोकसभा चुनाव के नुकसान की भरपाई के लिए बीजेपी के लिए अब ये उनका ब्रह्मास्त्र है.

झारखंड में BJP को झटका

ये तो रही महारास्ट्र की बात अगर झारखंड की बात करें तो यहां भी बीजेपी आदिवासी बनाम बांगलादेशी घुसपैठी का मुद्दा बनाकर हिंदूकत्व का कार्ड खेलने की पिराक में तो है ही बीजेपी ने यहां प्रत्याशियों का एलान का शुरुआती बढ़त लेने की कोशिश की है. जबकि जेएमएम, कांग्रेस और राजद गठबंधन में सीटों को लेकर बात फाइनल होने के बाद भी पूरी तरह गठबंधन फाइनल नहीं हो पाया है.

इसी बीच जेएमएम ने बीजेपी को झटका देते हुए उसके कई नेताओं को झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल कराया है और इसमें जो सबसे बड़ा नाम है वो बरेहट से हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बीजेपी के संभावित उम्मीदवार लुईस मरांडी भी शामिल हैं. लुईस मरांडी दुमका सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन बीजेपी ने उन्हें हेमंत सोरेन के खिलाफ बरेहट से चुनाव लड़ने को कहा था.

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