India Canada Row: ये 21वीं सदी का भारत है. अगर कोई उसे आंख दिखाने की जुर्रत करेगा तो उसका नतीजा कनाडा की तरह ही होगा. जी हां. कनाडा पिछले साल से ही एक खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के मर्डर मामले में बेबुनियाद आरोप लगाकर भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन पहले भी और अब एक बार फिर भारत ने बता दिया कि वो अब किसी के दबाव में नहीं आता.
जैसा कि आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के मर्डर केस में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के कथित आरोपों की जांच को लेकर कनाडा ने छह भारतीय डिप्लोमैट्स और दूतावास के अधिकारियों को निष्कासित कर दिया है. वहीं भारत ने भी कनाडा के छह डिप्लोमैट्स को निष्कासित कर दिया और उन्हें 19 अक्टूबर तक भारत छोड़ने को कह दिया है. साथ ही कनाडा में अपने राजदूत संजय कुमार वर्मा को भी वापस बुला लिया.
क्या इस फैसले की वजह
इस मामले में आगे बढ़े इससे पहले आपको ये बता दें कि कनाडा में सिखों की आबादी 2.1 फीसदी है और कनाडा में सिखों के समर्थन पर ही ट्रूडो सरकार टिकी हुई है. ऐसे में समझा जा सकता है कि अक्टूबर, 2025 में कनाडा में होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सामने क्या और कितनी बड़ी चुनौती है. कनाडा की ओर से भारत विरोधी बयान के क्या मायने हैं उसे समझना मुश्किल नहीं.
इसी को कहते हैं जैसे को तैसा. लगता है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ये भूल गए कि भारत में अभी भी प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली ही सरकार है. इस सरकार के रहते दुनिया का कोई भी देश चाहे वो खुद को कितना ही ताकतवर क्यों न समझे. भारत के साथ भिड़ेगा तो उसको ऐसा ही तीखा और तल्ख जवाब मिलेगा. जैसा कनाडा को मिला है.
सरकार का फैसला
भारत ने कल कनाडा के छह डिप्लोमैट को निष्कासित करते हुए उन्हें 19 अक्टूबर तक भारत छोड़ने को कह दिया. साथ ही भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त और निशाना बनाए जा रहे अन्य डिप्लोमैट और अधिकारियों को वापस बुलाने की घोषणा कर दी है. गौरतलब है कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेटों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के कथित आरोपों की जांच को लेकर कनाडा ने छह भारतीय डिप्लोमैट्स और दूतावास के अधिकारियों को निष्कासित कर दिया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक हमें अपने राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कनाडा की मौजूदा सरकार की प्रतिबद्धता पर भरोसा नहीं है, इसलिए भारत ने अपने राजदूत और राजनयिकों को वापस बुलाने का फैसला लिया है. दरअसल, इस मामले को लेकर भारत और कनाडा के बीच पिछले साल से ही तनाव चल है. इसी बीच रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस ने भारत को लेकर गंभीर आरोप लगा दिए जिसके बाद तनाव चरम पर पहुंच गया.
कनाडियन पुलिस का आरोप
पुलिस कमिश्नर माइकल ड्यूहेम ने कहा कि हाल के सालों में कनाडा में मर्डर, एक्सटॉर्शन और दूसरी आपराधिक गतिविधियों में भारतीय एजेंटों की सीधी भूमिका रही है और उन पर आरोप लगाए गए हैं. रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस के मुताबिक खालिस्तानी समर्थकों की जान का खतरा बढ़ा है और इसी साल फरवरी में इन खतरों की जांच के लिए एक टीम बनाई गई थी, जिसने भारत सरकार के एजेंटों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की कई जानकारियां जुटाई है.
इस बीच जस्टिन ट्रुडो ने कहा कि कनाडा का प्रधानमंत्री होने के नाते उनके देश के नागरिकों की सुरक्षा उनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. वो अपने नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने अपनी जांच एजेंसियों की ही बार को दोहराते हुए भारत पर आरोप लगाया कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट सीधे तौर पर शामिल थे और जांच एजेंसियों के पास इसके पुख्ता सबूत हैं.
कब क्या हुआ?
जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर जान ले ली थी. सितंबर 2023 में कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के हाथ होने का आरोप लगाया था. फिर अक्टूबर 2023 में भारत सरकार ने कनाडा से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने को कहा था. साथ ही इन राजनयिकों और उनके रिश्तेदारों को मिलने वाली राजनयिक छूट भी रद्द कर दी थी.
इसके बाद मई 2024 में सीबीसी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि कनाडा की पुलिस ने एक गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था. जिसका मानना था कि इन्हें ही भारत ने कथित रूप से निज्जर को मारने का काम सौंपा था. फिर 14 अक्टूबर 2024 रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस कमिश्नर ने कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में भारतीय एजेंटों के शामिल होने का आरोप लगाया.


