JK Assembly Election 2024: लोकसभा चुनाव के नतीजे आए अभी 4 महीने भी नहीं हुए हैं लेकिन लगता है कि कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की राजनीति का तौर-तरीका उनके सहयोगियों को परेशान करने लगा है. तभी जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि अब केवल पांच दिन का प्रचार अभियान बचा है. ऐसे में उम्मीद है कि कांग्रेस और राहुल गांधी अब अपना पूरा ध्यान जम्मू के मैदानी इलाकों पर केंद्रित करेंगे.
वैसे भी उमर अब्दुल्ला के दर्द को समझा जा सकता है क्योंकि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35 ए हटने के बाद इनकी राजनीति हाशिए पर है. जैसा कि सभी जानते हैं कि उमर अब्दुल्ला को इस बार के लोकसभा चुनाव में इंजीनियर राशिद ने बुरी तरह हराया है. ऐसे में उमर विधानसभा चुनाव को लेकर कोई ढिलाई नहीं चाहते हैं. आखिर सवाल उमर के राजनैतिक अस्तितव का है. लेकिन लगता है कि राहुल अपनी ही धुन में मगन है और अपनी ही शर्तों पर राजनीति करते लगते हैं.
राहुल गांधी ने दिखाई गंभीरता
लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने शुरुआत में संसद से लेकर सड़क तक जिस तरह की गंभीरता दिखाई उसे देखकर एक बार को तो लगा कि राहुल अब मेच्योर राजनीति कर रहे हैं और आगे भी करेंगे. लेकिन जम्मू कश्मीर और हरियाणा में चुनाव की घोषणा के बाद इसी महीने 8 सितंबर को राहुल गांधी अमेरिकी दौरे पर गए. पहले उन्होंने आरक्षण से लेकर सिक्खों पर विवादित बयान दिया जिसे लेकर बवाल मचा और फिर वो अमेरिका से चार से पांच दिनों के लिए लापता हो गए. जिसका सस्पेंस आज तक सस्पेंस ही है.
लेकिन राहुल जब अमेरिका से लौटे तो जम्मू कश्मीर और हरियाणा में चुनाव प्रचार करने की जगह अपने परिवार यानी मां सोनिया और बहन प्रियंका के साथ शिमला में छुट्टी मनाने चले गए और वहां से लौटे तो कश्मीर पहुंच गए. जबकि कश्मीर घाटी में कांग्रेस का बहुत कम दांव पर लगा है क्योंकि यहां तो नेशलन कॉन्फ्रेंस ही ज्यादातक सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
चुनाव प्रचार गठबंधन के लिए बेहतर
तभी उमर अब्दुल्ला को कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को जम्मू पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. उमर ने कहा कि कांग्रेस कश्मीर में क्या प्रदर्शन करती है, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण जम्मू में कांग्रेस का प्रदर्शन है क्योंकि जम्मू में कांग्रेस जितना बेहतर करेगी, उतना ही एनसी और कांग्रेस गठबंधन के लिए बेहतर होगा. वैसे कांग्रेस ने जम्मू के मैदानी इलाकों में उतना काम नहीं किया है, जितना नेशनल कॉन्फ्रेंस उससे उम्मीद करती है.
उमर का ये कहना कि जम्मू में गठबंधन की ओर से जो सीटें दीं गई है उनमें से अधिकांश कांग्रेस पार्टी को मिलीं, फिर भी जम्मू में कांग्रेस का अभियान अभी शुरू होना बाकी है. जबकि यहां प्रचार के लिए सिर्फ पांच दिन ही बचें है. इसलिए मुझे उम्मीद है कि घाटी में इस एक सीट पर राहुल के प्रचार समाप्त करने के बाद, कांग्रेस अपना पूरा ध्यान जम्मू के मैदानी इलाकों पर केंद्रित करेगी. उमर अब्दुल्ला गंदेरबल और बडगाम विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं.
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन में कांग्रेस पार्टी 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस 90 विधानसभा सीटों में से 51 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस और उमर कीा चिंता को समझा जडा सकता है क्योंकि वो 10 साल से सत्ता का इंतजार कर रहे हैं और राहुल है कि अपनी शतों वाली राजनीति की आदत नहीं छोड़ रहे हैं.


