One Nation One Election: केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को मंजूरी दे दी गई है. कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस संबंध में जानकारी दी. कैबिनेट ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर बनाई गई उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं. इस कमेटी में कुल दस लोग थे.
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली कमेटी द्वारा तैयार किए गए ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के ड्राफ्ट को अब केंद्रीय मंत्रिमंडल से बुधवार को मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद अब इस बिल को अगले संसदीय सत्र में पेश किया जाएगा. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विभिन्न सियासी दलों की प्रतिक्रिया आने लगी है.
कांग्रेस के आरोपों पर जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘ये प्रैक्टिकल नहीं है ये चलने वाला नहीं है. ये इश्यू को डाइवर्ट करने के लिए है. पूरे देश के लोग इसको मानने वाले नहीं हैं.’ इसके अलावा मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने प्रतिक्रिया दी.
मल्लिकार्जुन खरगे की ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को अव्यवहारिक बताने वाली टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘बहुत जल्दी विपक्ष में आंतरिक दबाव (एक राष्ट्र एक चुनाव के बारे में) न बनने लगे क्योंकि 80% से अधिक लोगों ने इसे सकारात्मक समर्थन दिया है, खासकर युवा, वे इसके पक्ष में हैं.’
विपक्षी दल की प्रतिक्रिया
जीतू पटवारी ने कहा, ‘वन नेशन वन इलेक्शन, भाजपा और उनकी विचारधारा कभी भी लोकतांत्रिकता को नहीं अपनाती है, कारण है कि उनकी ही संस्थान में कभी चुनाव नहीं होते हैं. वन नेशन वन इलेक्शन पर हमारी पार्टी का जो वक्तव्य होगा वहीं हमारा भी वक्तव्य होगा.’
जबकि राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, “वन नेशन वन इलेक्शन नहीं हो सकता, कानून में संशोधन करने पड़ेंगे और कानून में संशोधन करने के लिए इनके पास प्रयाप्त बहुमत नहीं है. वे अपनी विफलताओं के ऊपर से ध्यान हटाने के लिए ऐसा करते हैं. महिला आरक्षण का बिल पास कराया गया, क्या वह लागू हुआ? इसी तरीके से वन नेशन वन इलेक्शन का प्रोपेगेंडा है.”


